||| मनहूस गुड़िया ||| भाग - 1 ¶¶¶¶¶¶¶¶¶¶¶¶¶¶¶¶¶¶¶¶¶¶¶ ||| मनहूस गुड़िया ||| भाग - एक ||| ¶¶¶¶¶¶¶¶¶¶¶¶¶¶¶¶¶¶¶¶¶¶¶¶¶ आज शाम बजे से ही आसमान में काले-काले बादल मंडराने शुरू हो गए । ठंडी हवाएं चलने लगीं। और फिर बारिश शुरू हो गई। मैं अपने उसी शांत एकांत कमरे में बैठा हुआ खिड़की से बाहर का दृश्य देख रहा था । फिर मैं उठा और बाहर आ कर दरवाजा खोल, बारिश को देखने लगा ! एक ठंडा सा एहसास मन-मस्तिष्क में प्रवेश किया , तो एक ताजगी सी महसूस हुई । कब तक खड़ा रहता, सो अंदर आया, और अपने बेड पर आ लेटा । आज सांझ से ही मन में उस गुड़िया का ख्याल आ रहा था, जो सबसे पहले दीनानाथ शिरोडकर को एक पोस्ट के जरिए मिली थी। और उसके बाद शिरोडकर साहब के घर में, मनहूस खामोशियों का सिलसिला सदा के लिए कायम होता चला गया। शिरोडकर साहब आज नितांत अकेले हैं । उनकी पत्नी जो 5 साल पहले गुजर चुकी हैं। उनकी कोई संतान नहीं है । 45 साल की उम्र में शिरोडकर , इस भरी दुनिया में तन्हाई की जिंदगी गुजार रहे हैं। और फिर मैं, अपनी सोचो में गुम हो गया। शिरोडकर साहब से मेरा परिचय तब हुआ , जब मैं सक्सेना साहब...