ए.आई. की दस्तक •••••••• (विशेष - किसी भी विषय के हजारों पक्ष-विपक्ष होते हैं, अतः इस लेख के भी अनेक पक्ष हो सकतें हैं। यह लेख विचारक का द्रुतस्फूर्त विचार है, इस विषय पर अन्य प्रकारों से भी विचार संभव है। ) ****** पिछले दशकों में किसी विद्वान् के लिखे साहित्य पर पीएचडी करते थे तब प्रथम अध्याय में उस रचयिता के बारे में जानने के लिए, और विषय को जानने के लिए उसके पास जाया करते थे, यह शोध-यात्रा कभी-कभी शहर-दर-शहर हुआ करती थी! लेकिन आजकल सब कुछ गूगल पर उपलब्ध है, आप बेशक कह सकते हैं कि इससे समय और पैसे की बचत हुई। लेकिन इस बारे में मेरा नजरिया दूसरा भी है, उस विद्वान् से मिलने जाना, उसका पूरा साक्षात्कार लेना, वह पूरी यात्रा- एक अलग ही अनुभव है। और अब ए.आई. का जमाना आ गया! अब तो 70% पीएचडी में किसी की जरूरत भी नहीं पड़ेगी। बेशक नयी तकनीक हमें सुविधा देती है, लेकिन कुछ बेशकीमती छीनती भी है। आप समझ रहे हैं ना कि कोई व्यक्ति आपके ही लिखे साहित्य पर पीएचडी कर रहा है और आपकी उसको लेश मात्र भी जरूरत नहीं! क्योंकि सब कुछ आपने अपना रचित गूगल पर डाल रखा है। या फिर व्याकरण शास्त्र पढ़ने के लिए...
हिमांशुपञ्चशती ✾ ✾ ✾ ✾✾ ✾ ✾ ✾ Himanshu-Panchashati ✾ ✾ ✾ ✾✾ ✾ ✾ ✾ प्रणेताऽनुवादकश्च – हिमांशु र् गौडः Author and Translator: Himanshu Gaur ISBN - सर्वाधिकारः प्रकाशकाधीनः All rights reserved प्रथम-संस्करणम् २०२२ First Edition 2022 १००० प्रतयः 1000 Copes ॥श्रीगणेश-सूर्य-बाबागुरु-यज्ञसम्राट्-समर्थश्रीशतकानां हिन्दीसमन्वितानां सङ्ग्रहः॥ प्रकाशकः हिमांशुजीचिन्तनधाराकेन्द्रम् हरिद्वारः, उत्तराखण्डम् Publisher: Himanshuji-Chintandhara-Centere Haridwar, Uttarakhand विषयसूचिः – १. श्रीगणेशशतकम् - २. सूर्यशतकम् - ३. बाबागुरुशतकम् - ४. यज्ञसम्राट्शतकम् - ५. समर्थश्रीशतकम् - ॥श्रीगणेशशतकम्॥ ✾✾✾✾✾✾✾✾✾✾✾✾ ...