मैं सामान्य आधुनिक कॉलेज में ना पढ़कर , एक पारंपरिक पद्धति से चलने वाले संस्कृत के महाविद्यालय में , आवासीय छात्रावास में रहकर पढ़ा हूं! वहीं मैंने अपना छात्रकाल व्यतीत किया । मेरे हॉस्टल में सभी लोग संस्कृत पढ़ने वाले थे, लेकिन साथ साथ हिंदी तथा अंग्रेजी का भी ज्ञान रखते थे । कंप्यूटर वे अपनी रूचि के अनुसार सीखते थे। तो दोस्तों! माहौल कुछ इस तरह था कि दो विद्यालय आमने-सामने थे , सड़क के उस पार पूर्व दिशा में संस्कृत महाविद्यालय डिग्री कॉलेज था जिसका नाम था - गंगाराम संस्कृत महाविद्यालय! और सड़क के इस तरफ था श्री नारायण बाबा द्वारा खोला हुआ एक कक्षा 8 से लेकर 12वीं तक का प्राइवेट हॉस्टल सहित गुरुकुल ! अकेले नारायण बाबा उस अपने प्राइवेट गुरुकुल में रहकर वहां रहने वाले 60 छात्रों को पढ़ाते थे सुबह 4:00 बजे ही वहां के बच्चे उठ जाते थे, तथा सबसे पहले उठकर संस्कृत के श्लोकों का उच्चारण करते थे। महान् पंडितराज जगन्नाथ महाकवि के द्वारा लिखी हुई गंगा जी की स्तुति - "गंगा लहरी"! जिसमें 51 श्लोक हैं, उसका पाठ महा के बच्चे बहुत ही मधुर स्वर में करते थे! क्योंकि 51 श्लोक पढ़ने म...