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विचारलहरी १ : हिमांशु गौड

क्या आपने गणेशलोक में जाकर वक्रतुण्ड के शयनकक्ष में सफेद कनेर के फूलों के इत्र का छिड़काव किया है??

क्या आपने विष्णु मंदिर में जाकर जगह-जगह तुलसी की मंजरियां लगाई है जिससे तुलसी की गंध वहां महकती रहे??

क्या आपने शिवलोक में जाकर सफेद कनेर के फूलों का गुलदस्ता , और बेलपत्र और भांग की पत्तियां वहां पर सजाई है ?

क्या आपने देवीलोक में जाकर जगह-जगह गुलाब के फूलों की मालाएं टांगी हैं?

क्या आपने वरुणसूक्त के मंत्रों
से वरुण देवता को आहुति दी है??

क्या आपने गुलाब के फूलों को शहद में डुबोकर उनसे महामृत्युंजय भगवान का हवन किया है??

क्या आपने नीम की लकड़ी से निर्मित गणेश जी की मूर्त्ति की लोबान जलाकर पूजा की है??

क्या आपने पूरे आषाढ़ के महीने किसी विशेष मंत्र का निर्जन जंगल में जाकर जाप किया है??

क्या आप जानते हैं पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र अगर शुक्रवार के दिन हो तो उस दिन किस मंत्र का जाप करने से सिद्धि मिलती है??

क्या आप जानते हैं कि ऊपर कही हुई प्रत्येक बात  में कितने रहस्य छुपे हुए हैं??

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संस्कृत सूक्ति,अर्थ सहित, हिमांशु गौड़

यत्रापि कुत्रापि गता भवेयु: हंसा महीमण्डलमण्डनाय हानिस्तु तेषां हि सरोवराणां येषां मरालैस्सह विप्रयोग:।। हंस, जहां कहीं भी धरती की शोभा बढ़ाने गए हों, नुकसान तो उन सरोवरों का ही है, जिनका ऐसे सुंदर राजहंसों से वियोग है।। अर्थात् अच्छे लोग कहीं भी चले जाएं, वहीं जाकर शोभा बढ़ाते हैं, लेकिन हानि तो उनकी होती है , जिन लोगों को छोड़कर वह जाते हैं ।  *छायाम् अन्यस्य कुर्वन्ति* *तिष्ठन्ति स्वयमातपे।* *फलान्यपि परार्थाय* *वृक्षाः सत्पुरुषा इव।।* अर्थात- पेड को देखिये दूसरों के लिये छाँव देकर खुद गरमी में तप रहे हैं। फल भी सारे संसार को दे देते हैं। इन वृक्षों के समान ही सज्जन पुरुष के चरित्र होते हैं।  *ज्यैष्ठत्वं जन्मना नैव* *गुणै: ज्यैष्ठत्वमुच्यते।* *गुणात् गुरुत्वमायाति* *दुग्धं दधि घृतं क्रमात्।।* अर्थात- व्यक्ति जन्म से बडा व महान नहीं होता है। बडप्पन व महानता व्यक्ति के गुणों से निर्धारित होती है,  यह वैसे ही बढती है जैसे दूध से दही व दही से घी श्रेष्ठत्व को धारण करता है। *अर्थार्थी यानि कष्टानि* *सहते कृपणो जनः।* *तान्येव यदि धर्मार्थी* *न  भूयः क्लेशभाजनम्।।*...

Sanskrit Kavita By Dr.Himanshu Gaur

ननकू : हिमांशु गौड: आख्यान

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