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हिन्दी कविता , हिमांशु गौड, गांवों में फिर रंग सजा दो

गांवों में फिर रंग सजा दो
लोगों को सम्मान सिखा दो
धरती की आभा का इक
संपत्ति-प्रतिमान दिखा दो
गंगा जी की लहरों में
भक्ति और विज्ञान दिखा दो
नृत्य शास्त्र की परंपरा का
खुश होकर उद्यान दिखा दो
किस किसको सोचोगे अब
सबको ही नव तान सुना दो
पुण्यसंपदा प्राप्त करो
वैष्णव लोकों का दृश्य दिखा दो
गणपति के मंदिर में जा
दूर्वा का श्रंगार चढ़ा दो
बिल्वपत्र विजया से शोभित
शिव जी को संभार चढ़ा दो
लौकिक और अलौकिक गतियां
शास्त्रों के अनुसार बना लो
डामर और पुत्तलिका तंत्रों
को शक्तिआधार बना लो
स्वरशास्त्रों की व्याख्याओं से
गंधर्वो के तार सजा दो
सरस्वती के मंत्रों से
आत्म तत्व झंकार बना लो
श्रवण धनिष्ठा नक्षत्रों के दिन
अनुष्ठान प्रारंभ करा दो
नानारूपधरी यक्षी से
चित्पक्षी साक्षात् करा दो
गुंजा सफेद का यंत्र बनाकर
डाकिनियों को पास बुला लो
.....

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संस्कृत सूक्ति,अर्थ सहित, हिमांशु गौड़

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