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नरवर की विचित्र कहानियां : हिमांशु गौड

एक कहानी ऐसी भी -
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भोजन का निमंत्रण आने की योगा को बहुत खुशी होती थी ! आज मुझे लगता है कि
शायद वहां घूमते हुए प्रेतों की वजह से ही कुछ लोगों पर उनका असर आ जाता था!
योगा कि इन्हीं विचित्र हरकतों के चलते उस को लोग एक विचित्र पुरुष मानते थे !
वह अनेक कलाओं में कुशल था!
गाने में प्रवीण था !
वह इतनी गप्प मारता था, और कल्पना-शक्ति उसकी इतनी ज्यादा थी कि लगता था कि उसकी कुंडली में चंद्रमा बहुत मजबूत हालत में है!
वह बहुत ज्यादा पढ़ता नहीं था क्योंकि गप्पबाजी से फुर्सत मिले , तब तो पढ़ें ! या फिर वह कभी-कभी अपनी सामर्थ्य को गुप्त भी रखता था जैसे न्याय शास्त्र के ग्रंथ
कारिकावली ,
जोकि शास्त्रों के महारथी श्री बाबा गुरु जी से ,अपने सभी सहपाठियों के साथ में पढ़ता था ,तो वह प्रायः सामान्य ही प्रदर्शन करता था ।
लेकिन एक बार वह सब से छुपकर एकांत और घने जंगलों में जा वटवृक्ष के नीचे सुबह 4:00 बजे से लेकर के और सुबह 9:00 बजे तक लगातार उसको कंठस्थ करता था और 1 दिन ऐसा आया ,
कि जब गुरुदेव ने उससे पूछा कि चलो कारिकावली सुनाओ,
तो उसने मानो जैसे झरने से जल की धारा गिरती है
वैसे ही
पूरी कारिकावली को एक झटके में ही सुना डाला !!
तब सारे शास्त्री एक ही बार में आश्चर्यचकित हो गए।
इसी तरह उसने एक छंद शास्त्रीय ग्रंथ को भी अचानक ही याद करके सुना दिया था।
क्योंकि और लोगों को यह पता भी नहीं था,
कि इसने याद कब कर लिया?
क्योंकि वह पूरा दिन तो गप्प ही मारता रहता है।
चलो !! आज आपको उन दिनों की तरफ ले चलता हूं ,
जब आसमान से बारिश होती थी तो
माहौल बहुत ही हरिल्लोक स्वप्नायमानानि दिनानि पश्यन् की तरह हो जाता था!!
जब कभी भयंकर बारिश हो रही है, और गंगा जी अपनी तीव्र गति से बह रही हैं ,
ऐसे में व्याकरण शास्त्र वेद पुराण आदि को पढ़ने वाले कुछ युवक, दिव्य गति से ,
हरे-भरे जंगलों में दौड़ते हुए एवं कभी गंगा जी की तरफ दौड़ते हुए
लगभग 20 फीट ऊपर से गंगा जी में छलांग लगाते थे !!
और बाबा की कुटिया के , 1 दिन में लगभग 20-30 चक्कर काट डालते थे !!
यह उन दिनों की बात है ,
जब हरिशंकर शर्मा , नाश्ते में 10 रोटियां सिर्फ गंगाजल के साथ ही खा जाता था !
और फिर दोपहर के भोजन में 20 रोटियां दाल के साथ ,
और रात्रि में फिर 15 रोटियां रात्रि भोजन के समय!
और २ किलो दूध पी कर सो जाता था!
और यह तो कुछ भी नहीं ,
जिसकी बॉडी देखकर पूरा शहर सुखमिश्रित-आश्चर्य का अनुभव करता था,
वह देवीप्रसाद शर्मा, जो प्रतिदिन,
तीन बार स्नान करता था !
सभी शास्त्रों के नियमों का पालन एवं दुर्गा सप्तशती का रोजाना पाठ करता था!
उसकी भूख इतनी ज्यादा थी ,
कि वह कम से कम 50 रोटी एक बार में खा जाता था।
और 5 किलो खीर एक ही बार में पी जाता था ,
एक बार वह जिम करने के लिए शहर के किसी जिम में गया ,
वहां जैसे ही कोच ने उसे सिखाने की कोशिश की , उसने बहुत सारे वज़न को एक ही साथ उठा दिया।
इस आश्चर्य को देख कर कोच, उनके चरणों में गिर पड़ा और कहा- गुरु जी ! आज से आप मेरे कोच हुए , और मैं आपका शिष्य......
देवीप्रसाद ने जीवन भर पेंट कमीज नहीं पहने थे ,वे हमेशा धोती कुर्ता ही पहनते थे और बड़े ही शुद्धता और सात्विकता से जीवन जीते थे ।
एक उनके ही मित्र थे अशोक पाठक,
जोकि उनसे बहुत मजे लिया करते थे एवं विवाह संबंधी हास-परिहास करते रहते थे!
देवीप्रसाद का भैया शिवप्रसाद, बहुत अच्छा सिंगर था , गाना गाता था।
एक बार एक लवकुश नाम के छात्र ने शिवप्रसाद को कुछ कह दिया या शायद चांटा भी मार दिया था !
इस बात को लेकर देेेवीप्रसाद को इतना गुस्सा आया कि वह डंडा लेकर के उसके पीछे पीछे कुटिया पर आ गया सिर पर एक मुंडासा बांधकर !!
उससे लड़ने की खातिर लवकुश अपने साथ रीतेश को भी ले आया !
अभी लड़ाई शुरू होने वाली ही थी कि
श्री बाबागुरुजी, जो कि उधर से गुजर रहे थे उन्होंने ही इस मामले को रफा-दफा करवा दिया......
............
............जारी है
© हिमांशु गौड़

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