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दीपावली श्लोक २०१४, हिमांशु गौड

मायूरनाभसनिभं परिलोक्य हृद्यं
हारित्यसम्भृतवनानि तरूंस्तथार्द्रान्।
प्राभातिके शरदि दीपवदुत्सवेऽस्मिन्
श्रीवर्षिसौख्यवनितारमणं च नस्स्यात्॥

भावार्थ :

मोर जैसे नीले रंग की आकाश की हृत्प्रिय आभा को देखकर और हरियाले जंगलों को देखकर तथा भीगे वृक्षों को देखकर ,
आज मैं इस शरद ऋतु में , सुबह के समय दिवाली के दिन कामना करता हूं कि लक्ष्मी की वर्षा करने वाला सौख्य रूपक योषिद्रमण हमें प्राप्त हो ।

Seeing the lovely glow of the blue sky like peacocks, and seeing the green forests and the soaked trees,
Today, in this autumn, in the morning, on the day of Diwali, I wish that we get the happiness of rain of wealth.

#dr.himanshu_gaur

Dr.Himanshu Gaur

Writing date:
Diwali, 25/10/2014

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Sanskrit Kavita By Dr.Himanshu Gaur

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