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Sanskrit Hindi classes

 आपको सूचित किया जाता है की कक्षा 8 से 12 एवं B.A. और M.A. के विद्यार्थियों के लिए भी हिंदी और संस्कृत के ट्यूशन की व्यवस्था की जाती है।

 आप हमसे संपर्क कर सकते हैं।

 कक्षा 8 से 12 की जितनी भी हिंदी और संस्कृत की किताबें हैं ,उनके सभी प्रश्न उत्तर सहित परीक्षा की तैयारी सहित बढ़िया कोचिंग दी जाती है ।

तथा बीए और एमए संस्कृत से करने वाले विद्यार्थियों के लिए भी यह एक सुनहरा अवसर है।

इसके अतिरिक्त जो व्यक्ति संस्कृत की किसी भी परीक्षा की तैयारी करना चाहे, वह भी हमसे लाभ ले सकता है शनि रविवार को इससे भी अधिक समय दिया जा सकता है।

पढ़ाने का समय- सुबह 6:00 से 8:00

 एवं शाम 8 से 9

स्थान - नाकोड़ा नगर, उदयपुर।

अध्यापक - डॉ हिमांशु गौड़

फोन नं- 8319739212


Online coaching also available 

फोन पर संपर्क करके अपना बैच निश्चित कर सकते हैं।



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संस्कृत सूक्ति,अर्थ सहित, हिमांशु गौड़

यत्रापि कुत्रापि गता भवेयु: हंसा महीमण्डलमण्डनाय हानिस्तु तेषां हि सरोवराणां येषां मरालैस्सह विप्रयोग:।। हंस, जहां कहीं भी धरती की शोभा बढ़ाने गए हों, नुकसान तो उन सरोवरों का ही है, जिनका ऐसे सुंदर राजहंसों से वियोग है।। अर्थात् अच्छे लोग कहीं भी चले जाएं, वहीं जाकर शोभा बढ़ाते हैं, लेकिन हानि तो उनकी होती है , जिन लोगों को छोड़कर वह जाते हैं ।  *छायाम् अन्यस्य कुर्वन्ति* *तिष्ठन्ति स्वयमातपे।* *फलान्यपि परार्थाय* *वृक्षाः सत्पुरुषा इव।।* अर्थात- पेड को देखिये दूसरों के लिये छाँव देकर खुद गरमी में तप रहे हैं। फल भी सारे संसार को दे देते हैं। इन वृक्षों के समान ही सज्जन पुरुष के चरित्र होते हैं।  *ज्यैष्ठत्वं जन्मना नैव* *गुणै: ज्यैष्ठत्वमुच्यते।* *गुणात् गुरुत्वमायाति* *दुग्धं दधि घृतं क्रमात्।।* अर्थात- व्यक्ति जन्म से बडा व महान नहीं होता है। बडप्पन व महानता व्यक्ति के गुणों से निर्धारित होती है,  यह वैसे ही बढती है जैसे दूध से दही व दही से घी श्रेष्ठत्व को धारण करता है। *अर्थार्थी यानि कष्टानि* *सहते कृपणो जनः।* *तान्येव यदि धर्मार्थी* *न  भूयः क्लेशभाजनम्।।*...

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