Skip to main content

Posts

Showing posts from April, 2023

सूर्यशतकम् हिन्दीभावार्थसहितम् हिमांशुगौडकृतम्

|| सूर्यशतकम् || 〠〠〠〠〠〠〠〠〠〠〠〠 विदितशिवकरो यः खेचरैस्स्तूयमानो दिनमणिरतितीव्रोद्गामिभिः पूज्यमानः सकलमनुजकर्मख्यापकश्श्रीपपीस्सः प्रणतमिममथार्तं पातु मां पातकेभ्यः || १ ||   जानी गईं हैं शिवमयी किरणें जिसकी , सभी ग्रह-नक्षत्रों से स्तुत , अतितीव्र गति वाले सभी पदों से पूज्य , दिन के मणि , सभी मनुष्यों के कर्मों का व्याख्यान करने वाले , लोकरक्षक , मुझ प्रणत दुःखी भक्त की पातकों से रक्षा करें।   हरितहयरथेन भ्राम्यति ब्रह्मभाण्डे भ्रमितमतियुतानां   विभ्रमध्वंसकारी दिवसकरगुरुर्यो भ्राजते खे विशाले घटयतु स ममापि श्रीघनैस्सौख्यवृष्टीः || २ ||   जो हरे घोड़ों वाले रथ से इस ब्रह्माण्ड रूपी भाण्ड में घूमता है , भ्रमित बुद्धि वालों के भ्रम का नाश करता है , दिवस को करने वाला गुरु , जो इस विशाल आकाश में शोभायमान है , वह मेरे लिए भी समृद्धि के बादलों से सुख की बारिश करे!   मम सकलदुराशान् हे पपे! नाशय त्वं तपन! बुधनत! त्वं तापयेह्यद्य दुष्टान् सफलपथमहो मे स्वप्रकाशैतनुष्व जलमिव धनवृष्टिं जीवने मे कुरुष्व || ३ ||   हे पपी! मेरी सभी बुरी आशाओं को तुम नष्ट कर दो। तपन! विद्...