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श्री राघवाचार्य जी महाराज का संस्कृत श्लोकात्मक अभिनंदन : डॉ हिमांशु गौड़



।।श्रीमद्राघवाचार्याभिनन्दनम्।।
******
धर्मनिष्ठं वरिष्ठं सुशिष्टं मुनिं
क्लिष्टचर्यं शुभेष्टं विशिष्टं पुनः
चेष्टनाभ्यैषणाकृष्टकृष्णं द्विजं
राघवाचार्यमित्याह्वयं भावये।।१।।

धर्मकर्माब्धिरत्नप्रदं शोकहे
राममार्गे जनांश्चोदयन्तञ्च तं
गोखुरीं हो शिखां धारयन्तम्मुदा
राघवानन्दमग्नं हृदा चिन्तये।।२।।

लौकिकभ्रान्तिविध्वान्तविध्वंसकं
वैदिकार्थप्रभावैकवाक्संयुतं
दैवलीलागुणग्रन्थसत्पाठकं
राघवचार्यवर्यन्नुमश्शास्त्रिणम्।।३।।

रामपुर्यां वसन्तं वसन्तश्रियं
रामगुण्यानुवादैकगाथाप्रियं
शास्त्रतथ्यप्रकाशं सदा सद्धियं
राघवाचार्यपादारविन्दं भजे।।४।।

भावये राघवाख्यं सताम्मोदिनम्
अर्चये साधुवृन्दाकुलं बोधिनम्
कामये सङ्गतिं तस्य वाङ्मोदिन:
पालये राघवीभक्तिबीजं निजे।।५।।

गौड इत्याह्वयोहं हिमांशुश्च यश्-
श्रीलबाबागुरोराश्रमेऽधीतवान्
अद्य संश्रुत्य वाणीं भवत्सन्मुखात्
भावपद्यप्रसादो मयीहोदयत् ।।६।।
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डॉ.हिमांशुगौड:
१०:४१ रात्रौ,०५/०६/२०२०, शुक्रवासरे,
गाजियाबादस्थगृहे।

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