जीवत को है आम की बगिया मरते को गंगा जी, इसीलिए यूपी में बासा सबसे है चंगा जी, दिली मोहब्बत, अपनापन, महसूस भाव को करना, उसी जगह पर जिओ जहां हो प्यार वहीं पर मरना, क्या रहना उस देस में पंछी जहां न कोई अपना, करो बसेरा वहां हो जीवन जहां सलोना सपना, तन्हाई की सजा काटते जैसे जीवन सारा, पैसा चाहे मिले वहां ना रहना करो गंवारा, दोय बखत की रोटी खाकर, मगन रहो गांवां में, दौलत मिले भले कितनी परदेस नहीं जांवां मैं! ठंडी ठंडी पवन सुहानी गांव की वो बरसातें, वो खिलना फूलों का दिल ताज़ा करतीं सी बातें, नहीं कहीं अपनापन मिलता लोग बहुत मिलते हैं, बड़े नसीबों से दुनिया में दिलवाले मिलते हैं, चार दिना का जीवन जिसमें दोय दिना हैं बीते, हम अब भी है ऐसे जीते नहीं कि जैसे जीते, सुकूं है खोया, नहीं भरोसा होता सहसा सब पर, है फैली यह कैसी चुप्पी, मेहर मेरे रब कर, कंबल ओढ़े कड़क ठंड की रात अकेला चलता, गांव की सूनी गलियों में पूरा है चांद निकलता, कहीं भौंकते कुत्ते है, झींगुर की गूंज कहीं पर, सपने से में चलता मैं जुगनू की मौज कहीं पर, कौन मुझे पहचानेगा दरवाजे किसके जाऊं, आधी रात किवाड़ पे लटकी सांकल या खड़काऊं...